महिलाओं के लिए स्प्लिट वर्कआउट प्लान: हफ़्ते में 4 दिन
जिम के लिए एक रेडी-मेड प्रोग्राम: हफ़्ते में 4 दिन (सोम, मंगल, गुरु, शुक्र), 25 एक्सरसाइज, हर दिन के लिए सेट्स और रैप्स। हर वर्कआउट अलग मसल ग्रुप्स को ट्रेन करता है, ताकि उन्हें रिकवर होने का पूरा समय मिले।
हर एक्सरसाइज़ के नीचे: सेट्स × रैप्स।
दिन 1 लेग्स, ग्लूट्स, काफ्स
बारबेल बैक स्क्वाट4 × 8
स्लेड 45 डिग्री लेग प्रेस4 × 10
मशीन सीटेड हिप एडक्शन3 × 15
डंबल रियर लंज3 × 12
फार लेग हिप थ्रस्ट3 × 15
मशीन स्टैंडिंग काफ रेज़4 × 15
दिन 2 बैक, शोल्डर, बाइसेप्स
केबल पुलडाउन4 × 10
केबल सीटेड रो4 × 10
डंबल स्टैंडिंग बाइसेप्स कर्ल3 × 12
केबल पुशडाउन विद रोप3 × 15
डंबल सीटेड शोल्डर प्रेस3 × 10
डंबल स्टैंडिंग लेटरल रेज़3 × 15
दिन 3 लेग्स, ग्लूट्स, बैक
डंबल रोमानियन डेडलिफ्ट4 × 10
बारबेल लंज3 × 12
हाइपरएक्सटेंशन3 × 15
बारबेल हिप थ्रस्ट3 × 15
केबल डंकी किकबैक3 × 15
मशीन सीटेड हिप एडक्शन3 × 15
दिन 4 एब्स, शोल्डर, बैक
डंबल स्टैंडिंग ओवरहेड प्रेस3 × 10
केबल अपराइट रो3 × 12
डंबल रियर फ्लाई3 × 15
सिट-अप3 × 20
कैप्टन्स चेयर स्ट्रेट लेग रेज़3 × 15
लेग लिफ्ट के साथ फ्रंट प्लांक3 × 30
साइड प्लांक3 × 30
यह प्रोग्राम Gloox में पहले से उपलब्ध है
ऐप में रेडी-मेड प्लान्स खोलें। AI कोच आपके लक्ष्य और इक्विपमेंट के हिसाब से प्रोग्राम सेट करता है, और वर्कआउट के दौरान हर सेट के लिए वज़न सुझाता है।
कंप्यूटर पर हैं? फ़ोन का कैमरा यहाँ लगाएँ — सही स्टोर खुल जाएगा।
स्प्लिट वर्कआउट किसके लिए है
उन लोगों के लिए जो कम से कम दो-तीन महीने से ट्रेनिंग कर रहे हैं और हफ़्ते में 3–5 दिन जिम जा सकते हैं। इसमें हर मसल ग्रुप पर प्रति सेशन ज़्यादा काम होता है और अगले सेशन से पहले रिकवरी के लिए ज़्यादा आराम मिलता है।
प्रोग्रेस कैसे करें
जब आप सही फॉर्म के साथ हर सेट में तय रैप रेंज की ऊपरी सीमा तक पहुँच जाएं, तो अगली बार वज़न में 2.5–5% की बढ़ोतरी करें। सेट के आखिरी 1–2 रैप्स मुश्किल होने चाहिए, लेकिन आपकी फॉर्म सही रहनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या एक्सरसाइज़ बदल सकते हैं?
हाँ, बशर्ते बदली गई एक्सरसाइज़ भी उन्हीं मसल्स पर काम करे। हर एक्सरसाइज़ के पेज पर अन्य इक्विपमेंट के साथ मिलती-जुलती एक्सरसाइज़ दी गई हैं।
अगर कोई वर्कआउट छूट जाए तो क्या करें?
शेड्यूल को एक दिन आगे बढ़ा लें और छूटा हुआ वर्कआउट पूरा करें: हफ़्ते के दिनों की तुलना में वर्कआउट के दिनों का क्रम ज़्यादा मायने रखता है।